Thursday, August 14, 2008

स्वाधीनता दिवस

मेरे दोस्तों आप सबों को "स्वाधीनता दिवस " की बहुत बहुत मुबारकबाद ….. हम सब एक दूसरे को मुबारकबाद दे रहे हैं …. इस खूबशूरत दिन के लिए …. और शायद मुबारकबाद ही देते रह जायेगें …. और आज़ादी की बुनियादी बातों को दरकिनार करते रह जायेगें ….. कभी हमलोगों ने सोचा की आजादी क्या है ? कभी ये गौर करने की कोशिश की क्या हम वाकई आजाद हैं ? “आजादी ” …… “स्वतंत्रता दिवस ”… क्या है ये ?????????? ? क्या ये हमारे लिए एक त्यौहार की तरह है या फिर जश्न मनाने का एक खुबसूरत दिन ? या फिर उन महापुरुषों का जय जैकार करने का जिन्होंने भारत देश के लिए कुर्बानियां दी ? या फिर साल में आने वाले इस एक दिन को एक छुट्टी की तरह घर में बिता देने का ?????आजादी का मतलब ये नहीं होता की एक ज़मीन पे रहने वाले को किसी की गुलामी से आज़ाद करा देना …. आजादी का मतलब ये नहीं होता की हमें अपने पसंद के कपड़े पहनने ,खाने और अपने पसंद के कारोबार करने की आजादी मिल जाए …………॥ क्या है ये ????? आज़ादी नाम है सोच की आजादी का ….. जब तक हमारी सोच किसी और की गुलाम रहेगी तब तक हम हरगिज ख़ुद को आज़ाद नहीं तस्लीम कर सकतें …. जब तक इंसान की सोच आज़ाद नही होगी वह हमेशा अपने वाहियात सोचों के जंजीरों में जकडा हुआ ख़ुद को आज़ाद समझने की भूल कर आज़ादी की तौहीन करता रहेगा …… हमने जिन लोगों से आज़ादी छिनी … उसके ज़हर को हम आज भी ख़ुद से लगाये बैठे हैं … वह ज़ख्म जिसे अपने सिने पर आज़ादी के वक्त खाई थी वह ज़ख्म को हम आज तक अपने कन्धों पर थामे थामे नासूर बना चुके हैं …। आज भी हम उन वाहियात और घिनौने विचारों के गुलाम हैं जिसने हमारी आज़ादी के चेहरे पर हमेशा कालिख पोती है …. और उसी कालिख लगे चेहरे पर हम तिरंगा लहरा कर आज़ादी के खूबसूरत गीत गा रहें हैं ….आख़िर इन घिनौने विचारों से हमें आज़ादी कौन दिलाएगा …?? जिसने किसी माँ के कोख को हमेशा के लिए सुना कर दिया ??…. जिसने किसी बाप के आंखों को पत्थर बना दिया ??…॥ जिसने एक बहिन से उसके भाई को छीन लिया ??.. जिसने एक भाई के बहिन के आबरू को तार -तार कर दिया ??…. जिसने हमारे देश को दुनिया के सामने शर्मसार कर दिया ??…. जिसने इस देश के सीने में धड़कते मासूम दिल को डर और खौफ की सौगात दिए ?? .. नहीं मेरे दोस्तों नही …. ये सारे शैतान जो ऐसा करते हैं …. वह हमें कुछ नही दे सकते सिर्फ़ और सिर्फ़ हमें तबाह और बर्बाद कर सकते हैं …. और अगर हम इनके साए में डर कर जीने की मज़बूरी जैसे घटिया विचारों को हवा दी …. तो हमारा सही वजूद भी बाकी न रहेगा ….तो मेरे दोस्तों हमें अपने सोच को आजाद कराने कोई नही आएगा … अगर कोई आएगा तो वह खूबशूरत और मजबूत इंसान जो हमारे अन्दर ही कहीं न कही बैठा सिसक रहा है …। और जो बेबस और लाचार हमें धिक्कार रहा है ……… तो मेरे दोस्तों उस खूबशूरत इंसान का गला क्यों घोट रहें हैं हम ?? …आज इस सुनहरे मौके पर हम सब एक दूसरे से ये वादा करें की वह खूबशूरत इंसान जो हमारे अन्दर बैठा हुआ है उसे बाहर लायेगें उसे सिसक सिसक कर नही मरने देगें ….वह इंसान अगर बहार आया तो साड़ी वाहियात सोचें और फरेब को हमेशा के लिए ख़त्म कर देगा …….. तब हम आजाद होंगे और !! और !! पूरी दुनिया हमारी आजाद सोच के क़दमों में होगी …….. तब हम गर्व से कह सकेगें ……….हम आजाद है और हमारा भारत देश महान है ….जो मैंने नीचे चार लाइन लिखी है यह हमारे सारे नौजवान दोस्तों के लिए है जिन पर हमारी गुलाम सोचों को आजाद करने की जिम्मेदारी है ….न देखो हमे गर्द -व -गुबार के आईने में हम रौशन दिए है , अंधेरो का निशाँ तक मिटा जायेगें, लोग कहते हैं हम में ख़ुद को बदलने का हौसला नहीं , बाक़ी पर जूनून है कायम हम में , एक आसमान इस ज़मीन पे बिछा जायेगें एहसास आपके मुहब्बत के इंतजार में************************************************************************* आपका दोस्त पंकज तिवारी "सहज "

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