Tuesday, August 12, 2008

बिता हुआ लम्हा

कुछ बीते हुए लम्हों से मुलाकात हुई, कुछ टूटे हुए सपनो से बात हुई, याद जो करने बैठे उन तमाम यादो को तो आपकी ही यादो से शुरुआत हुई ,
हमारे ज़ख्मो की वजह भी वो है ,हमारे ज़ख्मो की दवा भी वो है ,वो नमक ज़ख्मो पे लगाये भी तो क्या हुआ ,मोहब्बत करने की वजह भी वो है ,
कुछ बीते हुए लम्हों से मुलाकात कुछ टूटे हुए सपनो से बात हुई याद जो करने बैठे उन तमाम यादो को तो आपकी ही यादो से शुरुआत हुई

आप सभी पढ़ने वालो का हार्दिक अभिनन्दन
पंकज तिवारी "सहज"

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