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Wednesday, January 14, 2009

सर्वश्रेष्ठ आचरण

सदाचारी पुरुषों की संख्या और शक्ति का जैसे-जैसे हास होता है, वैसे ही वैसे ही संसार में घोर अशांति पैदा होती सदाचार की स्थापना प्राणी मात्र के लिए कल्यानप्रद है जैसे भगवान श्री रामचंद्र जी मनुष्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ आचरण कराने के कारण ही मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये सद्पुरुशो द्वारा प्रमाणीत आचरण ही सदाचार है जब तक मनुष्य अपने जीवन को शुद्ध बनानेका कार्य नही करता ,अपने आचार विचार में सच्चाई नही लातातब तक वह धर्म पालन के योग्य नही बनता हमारे हिंदू धर्म का लक्ष्य तत्वज्ञान की प्राप्ति द्वारा कैवल्य मुक्ति पाना है जब की हमारा यह कार्य विचार शक्ति का विकाश किए बिना नही हो सकता ,विचार ही प्राणी के जीवन का वह दीपक है जैसे चित्र शक्ति विश्व शक्ति को प्रकाशित करती है ,वैसे ही हमारी विचार शक्ति जीवो के कर्तव्य पथ को निश्चित करती है विचारशक्ति का सम्यक विकास होने पर यह मालूम होता है कि ब्रम्ह ही इस श्रृष्टि रूपी रंगभूमि पर विलास कर रहा है ,उसके अतिरिक्त इस ब्रम्हांड में कुछ है ही नही इसलिए सबसे पहले मनुष्य बनने के लिए प्राणिमात्र को को प्रयत्न करना चाहिए ,मनुष्य के आकार मात्र से ही कोई मनुष्य नही बन जाता है ,उसमे मनुष्योचित गुण होना चाहिए आज हमारे समाज में वाशनाओ के कारण मनुष्य के चित्त में इतनी पराधीनता आ गई कि वह पूर्ण रूपेण से ईश्वर कि तरफ़ उन्मुख नही हो पाता है जिसके कारण आज हमारा समाज पतन कि ओर अग्रसर हैअतः हमें इससे बचने के लिए अपने अंदर सदाचार कि को अपने गुणों में समाहित करना होगा जिससे हमारे समाज का विकास हो इस कलयुग में ईश्वर कि भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ है आज के हमारे परिवेश में तमोगुण इतना बढ़ गया है कि मनुष्य अन्य साधनों को ठीक से नही कर पाता ,तामसी प्रवृति होने के कारण मनुष्य का मन एक जगह पर टिक नही पाता ,अतः इस कलि कल में भगवान को पाने का सर्वश्रेष्ठ साधन है ईश्वर भक्ति और उसका नाम और इस सरल साधना को प्रतेक व्यक्ति कर सकता है--------पंकज संतोष  कुमार तिवारी 

Thursday, January 8, 2009

गायत्री mantra

ओ३म् भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्







तूने हमें उत्पन्न किया

पालन कर रहा है तू तुझ से ही पाते प्राण हम, दुखियों के कष्ट हरता तू तेरा महान तेज है, छाया हुआ सभी स्थान सृष्टि की वस्तु वस्तु में, तु हो रहा है विद्यमान तेरा ही धरते ध्यान हम, मांगते तेरी दया ईश्वर हमारी बुद्धि को, श्रेष्ठ मार्ग पर चला भावार्थ _ हे परमेश्वर! आप हमारे प्रियतम् प्राण हो हमें अशुभ संकल्पों तथा भौतिक विपत्तियों से हमें दूर रखें हम आपके शुद्ध प्रकाशमय स्वरुप का दर्शन अपने अन्त: करण मे नित्य किया करें हे दिव्य प्रकाशक हमें प्रकाश की ओर ले चल आपका प्रकाशमय स्वरुप हमारी बुद्धियों को सन्मार्ग में प्रवृत्त करें हम न केवल अभ्युदय अपितु नि:श्रेयस भी प्राप्त करें